वोकेशनल ट्रेनिंग (Vocational Training) क्या होती हैं ?

वोकेशनल ट्रेनिंग (Vocational Training)

वोकेशनल ट्रेनिंग (Vocational Training), जिसे हिंदी में ‘व्यावसायिक प्रशिक्षण‘ कहा जाता है, एक ऐसी शिक्षा प्रणाली है जो किसी छात्र को किसी विशिष्ट नौकरी, व्यापार या शिल्प (Trade or Profession) के लिए व्यावहारिक ज्ञान और विशेष कौशल (Practical Skills) प्रदान करती है। व्यावसायिक प्रशिक्षण से तात्पर्य ऐसी शिक्षा और प्रशिक्षण से है जो व्यक्तियों को विभिन्न स्तरों की विशेषज्ञता वाले विशिष्ट व्यवसायों, शिल्पों या करियर के लिए तैयार करता है। यह व्यावहारिक, कौशल-आधारित और श्रम बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप होता है।

वोकेशनल ट्रेनिंग (Vocational Training) को परिभाषित करना

वोकेशनल ट्रेनिंग (Vocational Training), जिसे कैरियर और तकनीकी शिक्षा (CTE) के नाम से भी जाना जाता है, शिक्षार्थियों को किसी विशेष व्यवसाय में कार्य करने के लिए आवश्यक दक्षताओं से लैस करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। पिछले कुछ वर्षों में इस पर चर्चा का विषय बढ़ता जा रहा है क्योंकि छात्र ऋण संकट, हाथों से काम करने में सक्षम लोगों की भारी कमी, Gen Z की सीखने की शैली और कई अन्य प्रभावों के कारण पारंपरिक शिक्षा से हटकर व्यावसायिक कौशल पर जोर दिया जा रहा है।

वोकेशनल ट्रेनिंग (Vocational Training) कार्यक्रम आमतौर पर तकनीकी स्कूलों, सामुदायिक कॉलेजों, ट्रेड स्कूलों और तेजी से ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से पेश किए जाते हैं। हालांकि हममें से अधिकांश लोग यह मान लेते हैं कि व्यावसायिक कौशल केवल इलेक्ट्रिकल, प्लंबिंग और मैकेनिकल तक ही सीमित हैं, वास्तविकता यह है कि व्यावसायिक प्रशिक्षण में इससे कहीं अधिक व्यापक क्षेत्र शामिल है, जिनमें शामिल हैं: उदाहरण –

  • ऑटोमोबाइल मरम्मत
  • प्लंबिंग और बिजली का काम
  • पाक कला
  • स्वास्थ्य सेवा सहायक (जैसे, नर्सिंग सहायक, चिकित्सा तकनीशियन)
  • सूचान प्रौद्योगिकी
  • वेल्डिंग और विनिर्माण
  • कॉस्मेटोलॉजी
  • निर्माण और बढ़ईगीरी

पारंपरिक स्कूली या कॉलेज शिक्षा (जैसे BA, BSc) जहां थ्योरी और किताबी ज्ञान पर ध्यान केंद्रित करती है, वहीं वोकेशनल ट्रेनिंग पूरी तरह से व्यावहारिक और प्रैक्टिकल अनुभव (Hands-on Experience) पर आधारित होती है जिससे कोर्स पूर्ण होते ही प्रशिक्षु कार्य करने के लिए तैयार (Job-ready) हो सके।

वोकेशनल ट्रेनिंग (Vocational Training) की मुख्य विशेषताएं

  • व्यावहारिक सीख (Hands-on Learning): इसमें क्लासरूम से ज्यादा वर्कशॉप या लैब में प्रैक्टिकल काम करके सिखाया जाता है।
  • कम समय सीमा: ये कोर्स पारंपरिक डिग्री (3-4 साल) की तुलना में काफी छोटे होते हैं, जो कुछ महीनों से लेकर 1 या 2 साल तक के हो सकते हैं।
  • रोजगार पर ध्यान (Industry Focused): यह ट्रेनिंग सीधे तौर पर बाजार की मांग (Market Demand) के अनुसार तैयार की जाती है ताकि छात्रों को तुरंत नौकरी मिल सके।

वोकेशनल ट्रेनिंग (Vocational Training) के मुख्य उदाहरण और क्षेत्र

यह प्रशिक्षण कई अलग-अलग क्षेत्रों में दी जाती है, जैसे:

क्षेत्रकोर्स के उदाहरण
तकनीकी एवं इंजीनियरिंगफिटर, इलेक्ट्रिशियन, प्लंबर, वेल्डर, ऑटोमोबाइल मैकेनिक
आईटी और कंप्यूटरवेब डिजाइनर, डेटा एंट्री ऑपरेटर, कंप्यूटर हार्डवेयर, कोडिंग
हेल्थकेयरनर्सिंग असिस्टेंट, मेडिकल लैब तकनीशियन, जनरल ड्यूटी असिस्टेंट
हॉस्पिटैलिटी और क्रिएटिवकुकिंग/शेफ, ब्यूटी एंड वेलनेस (ब्यूटीशियन), फैशन डिजाइनिंग
मैनेजमेंट और रिटेलडिजिटल मार्केटिंग, रिटेल सेल्स एसोसिएट, अकाउंटिंग

भारत में वोकेशनल ट्रेनिंग कहाँ से मिलती है?

भारत में व्यावसायिक प्रशिक्षण के लिए कई सरकारी और निजी संस्थान हैं:

  1. ITI (औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान): यह भारत सरकार द्वारा संचालित सबसे लोकप्रिय माध्यम है जहाँ 8वीं और 10वीं के बाद तकनीकी ट्रेड्स सिखाए जाते हैं।
  2. पॉलिटेक्निक डिप्लोमा: इंजीनियरिंग और अन्य क्षेत्रों में 3 साल के व्यावहारिक डिप्लोमा कोर्स।
  3. प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) : सरकार की इस योजना के तहत युवाओं को अलग-अलग उद्योगों से जुड़े स्किल डेवलपमेंट कोर्स मुफ्त या बहुत कम फीस में कराए जाते हैं।

वोकेशनल ट्रेनिंग के लाभ

  • नौकरी: चूंकि छात्र पहले से ही काम सीख चुके होते हैं, इसलिए निजी एवं सरकारी कंपनियां उन्हें प्राथमिकता देती हैं।
  • आत्मनिर्भरता: इस ट्रेनिंग के बाद छात्र अपना खुद का व्यवसाय (जैसे गैराज, सैलून, मोबाइल रिपेयरिंग शॉप) भी आसानी से शुरू कर सकते हैं।
  • कम खर्च: डिग्री कोर्स के मुकाबले इन कोर्सेज की फीस काफी कम होती है।

और जानें

CTI और CITS क्या होता हैं ?

Leave a Comment

error: Content is protected !!